जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ और WHO के प्रयास...


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हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और पुरानी फेफड़ों की बीमारियाँ जैसे गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases) आज एक मौन स्वास्थ्य संकट बन चुकी हैं, जो तेज़ी से पूरी दुनिया के महानगरों और छोटे कस्बों में फैल रही हैं।

News Bharat Pratham, New Delhi, Published by Deepak, 1 November, Saturday, 2:45 AM IST

विश्वभर में आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ सबसे अधिक मौतों का कारण बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब वैश्विक स्तर पर होने वाली तीन-चौथाई से अधिक मौतें इन्हीं बीमारियों से हो रही हैं, जो संक्रमण या महामारी से कई गुना ज़्यादा है।

भारत जैसे विकासशील देश में यह समस्या और भी तेज़ी से बढ़ रही है, जहाँ तेज़ शहरीकरण, तनाव, जंक फूड, प्रदूषण और व्यायाम की कमी ने स्वास्थ्य के लिए एक खतरनाक माहौल पैदा कर दिया है। युवा वर्ग, पहले कम जोखिम वाला माना जाता था। अब मोटापा, हृदय रोग और प्रारंभिक मधुमेह जैसी बीमारियों का शिकार होता जा रहा है। यह एक स्वास्थ्य संकट के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक संकट भी है। बढ़ते चिकित्सकीय खर्चों से परिवार टूट रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी-भरकम दबाव पड़ रहा है।

“आधुनिक जीवनशैली की इन बीमारियों” ने धीरे-धीरे उत्पादकता घटा दी है, आयु कम कर दी है और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा डाल दी है। इस संकट को बढ़ाने वाली “Chronic Lifestyle Diseases,” हमारे जीवन के सुकून को खाए जा रही हैं और अगर हम अभी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ ऐसी बीमारियों के कारण नष्ट हो सकती हैं, जबकि इन्हें आसानी से रोका जा सकता है।

इस बढ़ोतरी के पीछे कारण क्या है?

हमारी आदतें और पर्यावरणीय परिवर्तन जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि के पीछे सबसे बड़े कारण हैं।

1.         निष्क्रिय जीवनशैली और फास्ट फूड: ताज़ा और पौष्टिक भोजन की जगह अब फास्ट फूड, मीठे पेय, और प्रोसेस्ड स्नैक्स ने ले ली है। व्यायाम की कमी से मोटापा, उच्च रक्तचाप और मेटाबॉलिज़्म की समस्या बढ़ रही है।

2.         शराब, धूम्रपान और प्रदूषण: धूम्रपान और शराब से अंगों को नुकसान पहुँचता है, जबकि प्रदूषित हवा फेफड़ों और हृदय पर ज़हरीला प्रभाव डालती है। यह एक बेहद खतरनाक मिश्रण है।

3.         तनाव और शहरीकरण: लगातार तनाव, कम नींद और मानसिक अस्वास्थ्य आधुनिक जीवन में क्रोनिक बीमारियों के प्रमुख कारण हैं।

4.         कमज़ोर स्वास्थ्य व्यवस्था और देर से पहचान: कई जगह बीमारियाँ तभी पकड़ी जाती हैं जब वे गंभीर हो चुकी होती हैं। समुचित जांच और प्रारंभिक इलाज की कमी बीमारी को और बढ़ा देती है।

5.         बुज़ुर्ग होती जनसंख्या: बढ़ती आयु के साथ बीमारियों का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, लेकिन अस्वस्थ जीवनशैली इसे पहले ही सामने ला देती है।

अधिकांश कारण से रोके जा सकते हैं, अगर हम अपनी आदतें बदलें, जागरूक हों और स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करें।

क्या किया जा सकता है रोकथाम और इलाज?

ऐसे संकटों से निपटने के लिए व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार सबका सामूहिक प्रयास आवश्यक है।

व्यक्तिगत स्तर पर:

•           प्राकृतिक और ताज़ा भोजन खाएँ: अधिक फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज और कम से कम चीनी व जंक फूड।

•           कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहें: रोज़ाना पैदल चलें, साइकिल चलाएँ, योग करें, नृत्य करें, जो भी आपको पसंद हो।

•           धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें: ये धीमे ज़हर हैं।

•           नियमित स्वास्थ्य जांच कराएँ: शुगर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराएँ।

•           तनाव को नियंत्रित करें: संगीत, ध्यान, व खेलकूद के ज़रिए मन को शांत रखें।

सरकार और सामाजिक स्तर पर:

•           स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाएँ — स्कूलों, दफ्तरों और मीडिया में।

•           ट्रांस-फैट पर प्रतिबंध लगाएँ और युवाओं के बीच जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाएँ।

•           हरे-भरे क्षेत्र और वॉकिंग ट्रैक बनवाएँ ताकि लोग फिट रहें।

•           प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करें ताकि बीमारी जल्दी पहचानी और इलाज हो सके।

•           कार्यस्थलों पर फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बढ़ावा दें।

मजबूत नीतियों और छोटी जीवनशैली परिवर्तनों के मेल से इस वैश्विक महामारी को रोका जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ का वैश्विक मिशन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को अपनी वैश्विक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इसका लक्ष्य है 2030 तक NCDs से होने वाली समयपूर्व मौतों को एक-तिहाई तक घटाया जाए।

WHO की रणनीति चार मुख्य जोखिम कारकों पर केंद्रित है

धूम्रपान, शराब, अस्वास्थ्यकर आहार और निष्क्रिय जीवनशैली। यह प्रत्येक देश को अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में NCD नियंत्रण शामिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

इसके तहत WHO डिजिटल हेल्थ समाधान, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम और रोग जांच सेवाओं को समर्थन दे रहा है। यह हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और स्वच्छ वायु अभियानों पर भी काम कर रहा है। साथ ही, संगठन भोजन, शराब और तंबाकू उद्योगों से भी ज़िम्मेदारी से काम करने की अपील कर रहा है ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ केवल चिकित्सकीय समस्या नहीं हैं, यह पूरी दुनिया के लिए चेतावनी हैं।

स्वास्थ्य अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है; यह हमारे रसोईघर, कार्यस्थल और दैनिक जीवन की पसंदों से शुरू होता है।

अगर हम संतुलित आहार लें, रोज़ व्यायाम करें, नशे से दूर रहें और स्वास्थ्य-पक्षीय नीतियों का समर्थन करें, तो एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जहाँ “स्वस्थ रहना ही नई सामान्यता” बन जाए।

जागरूकता ही पहला कदम है, और इसकी शुरुआत आज से ही करनी होगी।

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