तिथि नहीं पता हो तो ऐसे करें पितृ पक्ष..

पितृ पक्ष यानी वो 15 दिन जब हम अपने पूर्वजों (जो अब इस दुनिया में नहीं हैं) को याद करते हैं। इस दौरान हम उनके लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले।
ये समय हर साल भादों (सितंबर-अक्टूबर) में आता है, पूर्णिमा के बाद अमावस्या तक चलता है। लोग अपने घरों में पूजा करते हैं, पंडितों को बुलाकर खाना खिलाते हैं और ज़रूरतमंदों को दान देते हैं।
पितृ पक्ष क्यों ज़रूरी माना जाता है?
1. बड़ों का कर्ज चुकाना:
हिंदू धर्म कहता है कि हम सब अपने देवता, गुरु और पूर्वजों के ऋणी होते हैं। श्राद्ध करने से हम पितरों का कर्ज चुकाते हैं।
2. आत्मा को शांति मिलती है:
मान्यता है कि कुछ आत्माएं मरने के बाद भी चैन से नहीं होतीं। अगर उनके लिए कोई श्राद्ध करता है, तो उन्हें मोक्ष या शांति मिलती है।
3. घर में सुख-शांति आती है:
जब हमारे पूर्वज खुश होते हैं, तो वे आशीर्वाद देते हैं और घर में बरकत होती है मतलब पैसा, सेहत और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
पितृ पक्ष के करने से क्या फायदे होते हैं?
1. पितरों की दुआ मिलती है
जिससे ज़िंदगी की परेशानियाँ कम होने लगती हैं।
2. ग्रहों की गड़बड़ी शांत होती है
जैसे अगर कुंडली में पितृ दोष है, तो वो भी शांत होता है।
3. मन को सुकून मिलता है
जब हम अपने बड़ों को याद करते हैं, तो दिल को भी सुकून मिलता है।
4. पैसा, संतान और सेहत की रुकावटें दूर होती हैं
कई बार माना जाता है कि इन दिक्कतों की वजह भी पितरों की नाराज़गी हो सकती है।
पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए?
अपने पितरों के नाम से पिंडदान और तर्पण करें
पंडितों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं
गरीबों को दान दें, जैसे खाना, कपड़े, दक्षिणा
मांस, शराब और झगड़ों से दूर रहें
घर में शांति बनाए रखें और साफ-सफाई रखें
किसी से बुरा न बोलें, न सोचें
अगर तिथि याद नहीं है तो?
अगर किसी को ये नहीं पता कि उनके पिताजी या दादाजी की तिथि कब है, तो वे पितृ पक्ष के आख़िरी दिन यानी “सर्वपितृ अमावस्या” को श्राद्ध कर सकते हैं। ये दिन सभी पूर्वजों के लिए माना जाता है।
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