ग्रीन हायरिंग क्या है-क्यों बढ़ रहा है इसका चलन...


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ग्रीन हायरिंग (Green Hiring) नौकरी पाने की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंपनियाँ उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं जो पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हों, टिकाऊ विकास (Sustainability and Development) के सिद्धांतों को समझते हों और ग्रीन प्रैक्टिसेस को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हों।

Written by News Bharat Pratham Desk, New Delhi, Published by Deepak, 17 November 2025, Monday, 11:25 AM IST

यह एक ऐसा तरीका है जिसमें भर्ती के दौरान पर्यावरणीय मूल्यों को ज़रूर ध्यान में रखा जाता है—जैसे कि कार्बन फुटप्रिंट कम करना, ऊर्जा संरक्षण, और इको-फ्रेंडली कामकाज।

ग्रीन हायरिंग की प्रमुख प्रथाएँ (Practices):

1.         जॉब डिस्क्रिप्शन

नौकरी विवरण में पर्यावरणीय जिम्मेदारियों और टिकाऊ लक्ष्य स्पष्ट रूप से शामिल किया जाता है।

2.         कार्य संस्कृति का प्रचार

कम्पनी की ग्रीन नीतियों को उम्मीदवारों के साथ साझा किया जाता है ताकि समान विचारधारा वाले प्रतिभाशाली लोग आकर्षित हों।

3.         वर्चुअल इंटरव्यू व पेपरलेस प्रक्रिया

ऑनलाइन इंटरव्यू और ई-डॉक्यूमेंटेशन का उपयोग कर कार्बन उत्सर्जन और कागज की बर्बादी कम होती है।

4.         ग्रीन स्किल्स की जाँच

उम्मीदवारों की पर्यावरणीय जागरूकता, ग्रीन स्किल्स या सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स में भागीदारी परखी जाती है।

5.         इको-फ्रेंडली ऑनबोर्डिंग

नए जुड़े कर्मचारियों को डिजिटल ओरिएंटेशन, ई-लर्निंग आदि माध्यमों से परिचित कराया जाता है।

6.         ग्रीन ऑफिस पर्यावरण

कर्मचारियों को ऐसे वातावरण में काम करने का मौका दिया जाता है जहाँ ऊर्जा दक्षता, रिसाइक्लिंग, और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।

क्यों जरूरी है ग्रीन हायरिंग?

•           कंपनियों को पर्यावरणीय नियमों का पालन करने में मदद मिल सकती है।

•           ESG (Environmental, Social, Governance) मानकों के तहत बेहतर प्रदर्शन है।

•           टिकाऊ भविष्य के लिए जिम्मेदार कार्य संस्कृति का निर्माण होना सम्भव।

•           पर्यावरण और समाज की सुरक्षा में योगदान।

ग्रीन हायरिंग भविष्य की कंपनियों की पहचान है और यह सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो सकता है।

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