इज़रायल में ऐसे मनाते हैं हनुक्का का त्यौहार...

हनुक्का (Hanukkah) आठ दिनों तक मनाया जाने वाला एक यहूदी पर्व है इसको "समर्पण का पर्व" या रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है। यह लगभग 2,200 साल पहले मैकाबी (Maccabees) द्वारा यूनानी-सीरियाई सेना पर मिली जीत और यरूशलेम में दूसरे मंदिर को फिर से समर्पित करने की घटना की याद दिलाता है।
हनुक्का पर्व का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु तेल का चमत्कार है, जो दीपावली की कथा जैसा ही प्रेरणादायक है। जब मंदिर को शुद्ध किया गया, तो पुजारियों को मेनोराह (दीपक) जलाने के लिए केवल एक दिन का शुद्ध तेल मिला। चमत्कारिक रूप से, वह तेल पूरे आठ दिनों तक जलता रहा, जब तक कि तेल की नई आपूर्ति तैयार नहीं हो गई।
• मेनोराह प्रज्वलन यानी दीपक जलाना: मुख्य परंपरा नौ-शाखाओं वाले हनुक्कियाह (मेनोराह) को प्रजवलित करना है। सबसे पहले दिन एक दीपक और हर अगली रात एक अतिरिक्त दीपक प्रजवलित किया जाता है, ताकि आठवीं रात तक सभी आठ जल उठें।
• तले हुए पकवान: तेल के चमत्कार को याद करते हुए, तेल में तले हुए पकवान जैसे लतकेस (आलू के पैनकेक) और सूफगानियोत (जेली डोनट्स) खाने का चलन है।
• ड्रेइडल खेल: सब बच्चे एक चार-तरफा लट्टू ड्रेइडल से खेलते हैं व अक्सर चॉकलेट के सिक्के (गेल्ट) का दाँव लगाते हैं, जो मौज-मस्ती के साथ इस महान चमत्कार की याद दिलाता है।
यह त्योहार धार्मिक स्वतंत्रता, दृढ़ता और अंधकार पर प्रकाश की विजय का जश्न है, जो भारत के त्योहारों की भावना से बहुत मेल खाता है।
क्या है हनुक्का की कहानी: मैकाबी का संघर्ष
हनुक्का की कहानी लगभग 2,200 साल पहले यरूशलेम (जेरूसलम) की है। उस समय, यहूदी लोगों पर सेल्यूकिड साम्राज्य (यूनानी-सीरियाई) का राज था, जिसका नेतृत्व राजा एंटिओकस IV एपिफेन्स कर रहा था।
• उत्पीड़न और प्रतिबंध: एंटिओकस एक क्रूर राजा था। उसने यहूदी लोगों को उनकी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने से रोक दिया। उसने यहूदियों के सबसे पवित्र स्थान, यरूशलेम के मंदिर, को अपवित्र कर दिया और वहाँ यूनानी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित कर दीं, यहाँ तक कि मंदिर में सूअर की बलि भी दी गई।
• प्रतिरोध का उदय: एंटिओकस के अत्याचारों से तंग आकर, एक छोटे से यहूदी समूह ने विद्रोह करने का निर्णय लिया। इस समूह का नेतृत्व एक वृद्ध पुजारी, मत्तित्याहू (Mattathias), और उनके पाँच बेटों ने किया। इन बेटों में सबसे बहादुर और कुशल सेनापति यहूदा मैकाबी (Judah Maccabee) थे। "मैकाबी" का अर्थ है "हथौड़ा"।
• असंभव विजय: मैकाबी और उनके अनुयायी, जिन्हें मैकाबीज़ कहा जाता है, संख्या और हथियारों में यूनानी सेना के सामने बेहद कम थे। परंतु वे अपनी आस्था और स्वतंत्रता के लिए लड़ने को दृढ़ थे। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) की रणनीति अपनाई और कई वर्षों तक लड़ाई लड़ी। आखिरकार, उन्होंने एक शक्तिशाली साम्राज्य की सेना को हराकर असंभव जीत हासिल कर दिखाई।
• मंदिर का शुद्धिकरण (Hanukkah): अपनी जीत के बाद, मैकाबीज़ ने सबसे पहले यरूशलेम के मंदिर को यूनानी मूर्तियों और अपवित्रता से शुद्ध किया और फिर से समर्पित किया। इस पुनर्समर्पण के उत्सव को ही हनुक्का नाम दिया गया।
• तेल का चमत्कार: मंदिर को शुद्ध करने के बाद, उन्हें मेनोराह (सात-शाखाओं वाला पवित्र दीपक) को फिर से जलाना था। उन्हें केवल एक दिन के लिए पर्याप्त शुद्ध तेल मिल सका। उन्होंने दीपक जलाया, और चमत्कारिक रूप से, वह थोड़ा सा तेल आठ दिनों तक जलता रहा—जब तक कि नया शुद्ध तेल तैयार नहीं हो गया। इसी चमत्कार की याद में, हनुक्का आठ दिनों तक मनाया जाता है।
यह कहानी विश्वास, स्वतंत्रता और साहस की शक्ति का प्रतीक है, और यह सिखाती है कि थोड़ी सी रोशनी भी बड़े अंधकार को दूर करने में सक्षम है।
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