हनुमान अंश: नीम करोली बाबा की वो शक्ति जिसने जॉब्स और जुकरबर्ग की जिंदगी बदल दी

भारत में कई महान संतों ने जन्म लिया और 20वीं सदी के सबसे चमत्कारी और दिव्य संतों में नीम करोली बाबा Neem Karoli Baba का एक अलग ही स्थान है। आज, उनके असाधारण जीवन और शिक्षाओं को फिल्म 'हनुमान अंश' Hanuman Ansh के जरिए नए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इस आध्यात्मिक ब्लॉकबस्टर फिल्म को बनाने का श्रेय निर्देशक विशाल चतुर्वेदी Director Vishal Chaturvedi को जाता है। जो पहले मेडिकल पेशे में थे और फिर फिल्म निर्माता बन गए। उन्होंने इस भक्तिपूर्ण फिल्म की मुख्य कहानी तैयार करने में बीस साल लगा दिए, जिसे उन्होंने शुरुआत में 'डिवाइन डिटूर' Divine Detour नाम की किताब के रूप में लिखा था। लोग बाबा को हनुमान जी का सच्चा अंश मानते हैं। उनके इसी स्वरूप को पर्दे पर उतारने वाली इस फिल्म को स्वयंभू मीडिया नेटवर्क ने फंड व सपोर्ट किया। इसके साथ ही नम्रता जी. सिंह, रागिनी एस., अनुप्रिया ए. नगर और खुद चतुर्वेदी इसके सह-निर्माता हैं।
Written by Deepak H Sriram (Editor NBP)
इस बहुप्रतीक्षित आध्यात्मिक फिल्म में, शोभिनव सत्या ने बाबा के किरदार में बेहतरीन और प्रशंसनीय अभिनय किया है। बाबा के बचपन (लक्ष्मण दास) का रोल विहान शेडगे ने निभाया है। इनके अलावा राजीव मिश्रा, गुलशन पांडे, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी और चंदन के. आनंद ने भी शानदार सपोर्टिंग भूमिकाएं निभाई हैं। पर्दे पर दिखाए गए उनके जीवन को देखकर यह साफ हो जाता है कि नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) के अंदर भगवान हनुमान जैसी अलौकिक शक्ति व करुणा थी। हालांकि, महाराज जी ने कभी खुद को भगवान नहीं कहा; वे बस एक साधारण कंबल ओढ़ते थे और खुद को भगवान राम व हनुमान जी का एक मामूली सेवक बताते थे। लेकिन उनके चमत्कार, बिना बोले ही लोगों के मन की बात जान लेना और लाइलाज बीमारियों को ठीक करने की उनकी शक्ति ने यह साबित कर दिया कि बाबा कोई आम इंसान नहीं, बल्कि साक्षात 'हनुमान अंश' Hanuman Ansh थे।
फिल्म 'हनुमान अंश' Hanuman Ansh को बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि टीम के पास बड़े विज्ञापन अभियानों के लिए पैसे नहीं थे। रिलीज होने पर, इसका सीधा मुकाबला बड़े बजट की फिल्मों से हुआ, जिसकी वजह से पहले दिन की कमाई सिर्फ 10 लाख रुपये ही रही। दूसरे हफ्ते तक, सिनेमाघर मालिकों ने इसके शोज काफी कम कर दिए व इसे देशभर में सिर्फ 25 जगहों पर ही दिखाया जा रहा था, जिससे फिल्म फ्लॉप होने की कगार पर पहुंच गई। लेकिन हार मानने के बजाय, निर्माताओं ने लोगों के बीच जाकर प्रचार करने का फैसला किया और संत की शिक्षाओं को बांटने के लिए पारंपरिक भंडारे का आयोजन किया। इस अनोखी और जमीनी पहल से लोगों के बीच फिल्म की बहुत चर्चा हुई (वर्ड-ऑफ-माउथ), जिसने इसे बॉक्स ऑफिस पर एक सच्चा चमत्कार बना दिया। तीसरे हफ्ते में फिल्म ने जबरदस्त उछाल लिया व 53 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके एक संघर्षरत इंडी प्रोजेक्ट से एक बड़ी हिट बन गई। लोगों की यही अटूट श्रद्धा बिल्कुल उसी विश्वास जैसी है जिसने अपने जीवनकाल में बाबा जी को पूरे भारत में 108 से अधिक हनुमान मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया था।
उत्तराखंड की घाटियों में स्थित उनका पवित्र आश्रम, कैंची धाम Kainchi Dham, आज दुनिया भर में आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। इस महान संत की आध्यात्मिक ऊर्जा केवल भारत तक ही नहीं थी; इसका प्रभाव अमेरिका की सिलिकॉन वैली तक भी पहुंचा। कैंची धाम की एक यात्रा ने स्टीव जॉब्स Steve Jobs और मार्क जुकरबर्ग Mark Zuckerburg की जिंदगी में एक बहुत बड़ा मोड़ ला दिया। 1974 में, जब स्टीव जॉब्स बुरे दौर से गुजर रहे थे व उन्हें अपने भविष्य का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, तो वे आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद की तलाश में भारत आए। वे खास तौर पर बाबा के दर्शन करने कैंची धाम पहुंचे थे।
स्टीव के वहां पहुंचने से पहले ही नीम करोली बाबा महाराज जी अपना शरीर त्याग महासमाधि ले चुके थे लेकिन आश्रम की रहस्यमयी ऊर्जा ने जॉब्स को गहरी मानसिक शांति दी। सालों बाद, जब फेसबुक Facebook अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा था और बिकने की कगार पर था, तब स्टीव जॉब्स ने मार्क जुकरबर्ग को भारत जाकर उसी आश्रम में कुछ समय बिताने की सलाह दी। जुकरबर्ग वहां गए और वहीं उन्हें पूरी दुनिया को एक साथ जोड़ने का एक स्पष्ट नजरिया मिला।
महाराज जी के आशीर्वाद और प्रेम ने केवल टेक कंपनियों के दिग्गजों को ही आकर्षित नहीं किया, बल्कि कई पश्चिमी विद्वान भी उनके शिष्य बने। इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर रिचर्ड अल्परट हैं, जिन्हें आज राम दास के नाम से जाना जाता है। बाबा से मिलने के बाद, राम दास Ram Daas का जीवन पूरी तरह बदल गया। उन्होंने 'बी हियर नाउ' ( Book Be Here Now) नाम की एक बेस्टसेलर किताब लिखी, जिसने पश्चिम में भारतीय आध्यात्मिकता की लहर दौड़ा दी। उनके एक और प्रसिद्ध शिष्य हैं कृष्ण दास Krishn Daas, जिन्हें अक्सर "योग रॉकस्टार" Yoga Rockstar कहा जाता है। उन्होंने बाबा की उपस्थिति में भजन कीर्तन गाना सीखा और इसके लिए उन्हें ग्रैमी नॉमिनेशन भी मिला।
बाबा के शरीर त्यागने के बाद, श्री सिद्धि मां Sri Siddhi Maa ने भक्तों का मार्गदर्शन करने और कैंची धाम Kainchi Dham आश्रम को संभालने की पूरी जिम्मेदारी ली। वे बाबा की एक परम भक्त थीं, जिन्होंने अपने आखिरी दिनों तक बाबा की भंडारे, प्रेम और आध्यात्मिकता की परंपराओं को पूरी दुनिया में फैलाया।
आज भी, कैंची धाम Kainchi Dham एक बेहद शांत और खूबसूरत आश्रम है। यह उत्तराखंड के नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर, भवाली-अल्मोड़ा रोड पर शिप्रा नदी के किनारे देवदार के पेड़ों के बीच बसा है। वहां पहुंचने के लिए, आप काठगोदाम स्टेशन तक ट्रेन से जा सकते हैं फिर मंदिर तक सीधे बस या टैक्सी ले सकते हैं। पहाड़ों के बीच बसे इस स्थान पर आज भी इन 'हनुमान अंश' Hanuman Ansh की कृपा बरसती है, जो यहां आने वाले हर व्यक्ति को गहरी शांति का जादुई अहसास कराती है।
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