25 अक्टूबर गणेश विनायक चतुर्थी का महत्व...


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विनायक चतुर्थी वर्ष 2025 में शनिवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय यानी चतुर्थी मुहूर्त सुबह 10 बजकर 58 मिनट से दोपहर 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

News Bharat Pratham Desk, New Delhi, Published by Deepak Tak, 25 October 2025, Saturday

इस वर्ष कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर की रात 1 बजकर 19 मिनट पर होगी, और यह तिथि 26 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। इस शुभ अवधि में भगवान गणेश की आराधना करने से भक्तों को विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विनायक चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि

विनायक चतुर्थी भगवान श्री गणेश जी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा बड़े ही उत्साह और श्रद्धा से करते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और विवेक के देवता माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसके जीवन से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता प्राप्त होती है।

पूजा का शुभ समय (मुहूर्त)

विनायक चतुर्थी के दिन दोपहर का समय (मध्यान्ह मुहूर्त) सबसे शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इसी समय भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस मुहूर्त में पूजा करने से भक्तों को विशेष रूप से बुद्धि, धैर्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए अधिकतर लोग दोपहर में गणेश पूजा, आरती और नैवेद्य अर्पण करते हैं।

विनायक चतुर्थी का महत्व

इस दिन का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह भगवान गणेश की आराधना और आत्मिक शुद्धि का दिन होता है।

यह पर्व भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन व्रत रखने से मन की शांति, धैर्य और एकाग्रता बढ़ती है।

भक्त अपने जीवन में सफलता, धन, और समृद्धि की कामना करते हैं।

गणेश पूजा दोपहर के मुहूर्त में करने से विशेष दिव्य ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।

यह दिन नई शुरुआत करने, किसी शुभ कार्य का आरंभ करने या किसी बाधा से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजा की विधि और अनुशंसित कर्म

विनायक चतुर्थी के दिन सुबह स्नान के बाद घर के पूजास्थल को साफ करें। भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ वस्त्र पहनाएँ और पीले या लाल फूल चढ़ाएँ।

गणपति को मोदक, दूर्वा घास, गुड़ और नारियल का भोग लगाएँ।

“ॐ गं गणपतये नमः” या “वक्रतुण्ड महाकाय” जैसे मंत्रों का जाप करें।

पूरे दिन व्रत रखें या केवल फलाहार लें, और सायंकाल आरती करें।

दिनभर सकारात्मक भाव से प्रार्थना और भक्ति में समय बिताएँ।

विनायक चतुर्थी का संदेश

यह पर्व हमें यह सिखाता है कि यदि हम धैर्य, भक्ति और श्रद्धा से कार्य करें, तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं रहती। गणेश जी हमें विवेक, साहस और समझदारी के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

इस प्रकार, विनायक चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति, संयम और श्रद्धा का प्रतीक भी है। जब भक्त सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करते हैं, तो जीवन में नई ऊर्जा, स्थिरता और सफलता का संचार होता है।

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