2025 नवंबर उत्पन्ना एकादशी व्रत - तिथि, विधि लाभ...


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हर साल 24 एकादशियां आती हैं, जिनमें उत्पन्ना एकादशी विशेष मानी जाती है। यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है और पाप नाश का मार्ग बताती है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का प्राकट्य हुआ था, जिन्होंने भगवान विष्णु की आज्ञा से असुर मूर्खासुर का वध कर धर्म की रक्षा की थी। इसलिए यह तिथि “उत्पन्ना एकादशी” कहलाई।

Written by News Bharat Pratham Desk, New Delhi, Published by Sonia, 12 November 2025, Wednesday, 10:20 AM IST

Table of Contents

उत्पन्ना एकादशी 2025 नवम्बर तिथि

क्या है धार्मिक महत्व

व्रत के लाभ

कौन कर सकता है यह व्रत

व्रत की विधि और पूजन प्रक्रिया

निष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी 2025 नवम्बर तिथि: साल 2025 में उत्पन्ना एकादशी व्रत शनिवार, 15 नवंबर को मनाया जाएगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आता है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 14 नवंबर की रात्रि से प्रारंभ होकर 15 नवंबर की रात तक रहेगी।

क्या है धार्मिक महत्व: पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुर मूर्खासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया, तब भगवान विष्णु जी ने उसे परास्त करने के लिए एक अद्भुत शक्ति “एकादशी देवी” का सृजन किया। देवी ने मूर्खासुर का वध कर संसार को भयमुक्त कर दिया।

इसी दिन से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई, इसलिए इसे वर्ष की सर्वाधिक शुभ एकादशी कहा गया है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में पापों का नाश, मन की शुद्धि और विष्णु कृपा की प्राप्ति होती है।

व्रत के लाभ: उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से भक्त को आत्मबल, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

यह व्रत पापों का क्षय करता है।

मानसिक तनाव, भय व नकारात्मकता दूर होती है।

परिवार में सौहार्द व सुख का वातावरण बनता है।

आध्यात्मिक उन्नति व मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बनता होता है।

कौन कर सकता है यह व्रत: यह व्रत सभी स्त्री-पुरुष, युवा, विद्यार्थी और गृहस्थों के लिए उपयुक्त है। विशेष रूप से जो लोग मानसिक बेचैनी या आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

व्रत की विधि और पूजन प्रक्रिया: व्रत करने वाले दशमी तिथि की रात में सात्विक भोजन करें। एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने पूजा करें

तुलसी पत्ते, पीले फूल, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें। अन्न ना खाएं, केवल फलाहार या जल ग्रहण करें। जितना हो सके विष्णु मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 

का जाप करें और रात में जागरण करें। द्वादशी के दिन दान कर और ब्राह्मणों को भोजन कराएं व व्रत का पारण करें।

निष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि व भक्ति की साधना का दिवस है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, संतोष और आध्यात्मिक की राह पर ले जाता है। जो भी व्यक्ति श्रद्धा और निष्ठा से इस दिन व्रत करता है, वह भगवान विष्णु जी की कृपा से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति पाकर सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करता है।

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