ऐसे समझें 2025 बिहार चुनाव व मुख्य मुद्दे...

“बिहार की राजनीति” प्रमोद कुमार राय द्वारा लिखित एक पुस्तक में प्रमोद ने बताया है कि बिहार में राजनीति केवल सत्ता की कहानी नहीं, बल्कि यह समाज में व्याप्त असमानताओं, जातिगत ढाँचों व सामाजिक न्याय की प्रक्रिया से गहराई से जुड़ी है।
Written by Dharampal, New Delhi, Published by Deepak, 3 November 2025, Monday, 8:20 PM IST
बिहार की राजनीति लालू प्रसाद यादव व नीतीश कुमार के वर्चस्व की पुरानी लड़ाई से आगे बढ़ तेजस्वी यादव के उदय की ओर बढ़ रही है। 2025 का यह चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि यह पुरानी नीतियों और नई आकांक्षाओं के बीच का एक महत्वपूर्ण चुनाव होगा, जिसका आधार बदलते राजनीतिक समीकरणों और जातिगत गणित पर टिका है।
1. नीतीश व लालू का राजनीतिक इतिहास
लगभग तीस वर्षों से बिहार की राजनीति दो ध्रुवों—लालू यादव के सामाजिक न्याय और नीतीश कुमार के सुशासन तथा विकास के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
• लालू का कार्यकाल (RJD): जिसे पिछड़ी जातियों के राजनीतिक उभार के तौर पर जाना जाता रहा है, विरोधी दल जिसे अक्सर "जंगल राज" कहकर आलोचना करते रहे हैं (RJD अब इस पुरानी छवि को बदलने की कोशिश है)।
• नीतीश की राजनीतिक चालें (JDU): उनका राजनीतिक जीवन अवसर के अनुसार लगातार गठबंधन बदलने (जैसे NDA से महागठबंधन फिर वापस NDA में जाना) के लिए जाना जाता है। हालांकि इस लचीलेपन के कारण उनकी प्रासंगिकता बनी रही, लेकिन बार-बार पाला बदलने के कारण उन्हें 'मौकापरस्त' भी माना जाने लगा है। कुछ आलोचक उन्हें अब BJP के हाथों की "कठपुतली" भी कहने से नहीं चुकते।
2. तेजस्वी यादव का नया अध्याय: युवाओं की उम्मीदों पर ध्यान केन्द्रित करना
इस विश्लेषण में दिखता है कि 2025 का चुनाव महागठबंधन में तेजस्वी की निर्णायक केंद्रीय भूमिका को स्थापित करता है। RJD ने अपनी छवि को पूरी तरह से बदलने की रणनीति अपनाई है, जिसका लक्ष्य लालू के साथ जुड़े "जंगल राज" के दाग को हटाना है।
• नया एजेंडा: तेजस्वी यादव का प्रचार पूरी तरह युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य के विचार पर केंद्रित है।
• मुख्य वादे: रोजगार प्रत्येक परिवार को एक सरकारी नौकरी का वादा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं व शिक्षा जैसे ठोस मुद्दों पर जोर दिया है, जो सत्ता में बैठे 20 साल पुराने शासन के रिकॉर्ड को सीधे तौर पर चुनौती देते हैं।
• नेतृत्व: उन्हें महागठबंधन का स्पष्ट मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना गया है, जिससे गठबंधन NDA की तुलना में अधिक आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ मैदान में दिखाई देता है।
3. अहम चुनावी मुकाबला: पुरानी बातें बनाम वादों का हिसाब
2025 का चुनाव NDA के प्रचार और महागठबंधन के पलटवार के बीच सीधी टक्कर है:
• NDA की रणनीति: NDA (जिसमें BJP अब मुख्य भागीदार है) दो मुद्दों पर मुख्य रूप से ज़ोर दे रही है:
पहला, "जंगल राज" का डर: RJD के पुराने राज की याद दिलाकर गैर-RJD वोटों को अपने पक्ष में तोड़ना।
दूसरा, मोदी प्रभाव और कल्याण: प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय योजनाओं और विकास के वादों (1 करोड़ नौकरियों जैसे संकल्प) को प्रमुखता से पेश करना।
• महागठबंधन का जवाब: तेजस्वी वर्तमान शासन को "डबल जंगल राज" बताकर जवाब दे रहे हैं, और बहस को बेरोजगारी एंव पलायन जैसे आर्थिक मुद्दों की तरफ़ मोड़ रहे हैं। उनका घोषणापत्र 'बिहार का तेजस्वी प्रण' युवाओं और महिलाओं को लुभाने का प्रयास है, जिसमें एक सरकारी नौकरी और व्यापक कल्याणकारी योजनाओं का वादा किया गया है।
यह अध्ययन बताता है कि जहां जाति समीकरण दोनों गठबंधनों के लिए ज़रूरी हैं, वहीं बेहतर शासन और पलायन की समाप्ति की युवाओं की बढ़ती मांग के कारण आर्थिक और विकास के मुद्दे 2025 के चुनावी नतीजों में एक अभूतपूर्व और निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
बिहार में जातिगत समीकरण का खेल
राज्य में हाल ही में हुए जाति सर्वेक्षण ने राजनीति में जाति के महत्व को और भी बढ़ा दिया है। यह चुनाव मुख्य रूप से दो बड़े जातीय गठबंधनों के बीच टक्कर है:
1. महागठबंधन (MGB) की चुनावी की रणनीति
• नेता: तेजस्वी यादव नेतृत्व में हैं।
• आधार: गठबंधन अपने पारंपरिक M-Y (मुस्लमान-यादव) वोटों पर निर्भर है, जो कुल वोटरों का लगभग 32% है।
• विस्तार: तेजस्वी ने अब अति पिछड़ा वर्ग (EBCs) और दलित वोटों को साधने पर ज़ोर दिया है। वे छोटे कारीगरों (जैसे नाई, कुम्हार) को सरकारी नौकरी और कल्याणकारी योजनाओं का वादा करके, NDA के इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं।
2. NDA की रणनीति
• नेता: हालांकि नीतीश कुमार नाममात्र के नेता माने जाते हैं, BJP प्रभावी स्थिति में है।
• आधार: यह गठबंधन उच्च जातियों (जो पारंपरिक रूप से BJP के साथ हैं), नीतीश कुमार के पक्के EBC वोट बैंक (जनसंख्या का करीब 36%, जिसमें उनकी कुर्मी जाति भी शामिल है) और दलित मतदाताओं के एक हिस्से के समर्थन पर निर्भर करता है।
• रणनीति: BJP इस विविधतापूर्ण समूह को 'मोदी प्रभाव' और केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के ज़रिए बांधे रखने की कोशिश में है।
• चुनौती: नीतीश कुमार के बार-बार पाला बदलने से EBC समुदाय में उनकी निजि अपील कमजोर हुई है, जिससे महागठबंधन को इन निर्णायक वोटों को खींचने का बड़ा कारण मिल सकता है।
चुनाव में 36% EBC वोट बेहद निर्णायक कारक (स्विंग फैक्टर) है। दोनों गठबंधन यह साबित करने के लिए ज़ोर लगा रहे हैं कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के असली हितैषी वही हैं।
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