वह इंजीनियर नेता जिसने सड़कों की हालत बदल भारत का नया अध्याय लिखने का फैसला किया...
_400x300.jpeg)
भारतीय राजनीति में नेताओं की कोई कमी नहीं है, भाषण देने वाले, वादे करने वाले, नारे लगाने वाले, लेकिन कभी-कभी कोई विरला ही ऐसा नेता आता है जो बोलने से ज़्यादा काम करने में में यकीन रखता है। नितिन गडकरी ऐसे ही नेता हैं। उनके नाम से पहले जब "सड़क" शब्द आता है तो यह महज़ एक विभाग का ज़िक्र नहीं होता। यह उस सोच का ज़िक्र होता है जिसने पिछले एक दशक में भारत के बुनियादी ढाँचे को एक नया चेहरा दे दिया। गडकरी उस राजनेता का नाम है जिसे उनके विरोधी भी काम का आदमी मानते हैं।
Written by Anshita Nagar, Delhi, Published by Deepak Sriram, 2 June 2026, Tuesday, 4:30 PM IST
27 मई 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे नितिन जयराम गडकरी का पालन-पोषण एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ। पिता एक साधारण सरकारी कर्मचारी थे। बचपन से ही नितिन का स्वभाव व्यावहारिक था। वे सिद्धांतों से ज़्यादा समाधान में रुचि रखते थे। नागपुर विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक और फिर कानून की पढ़ाई के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े।
राजनीतिक की शुरुआत उन्होंने नागपुर नगर निगम से की, 1989 में वे पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने। 1995 में जब महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की सरकार बनी तो गडकरी को सार्वजनिक निर्माण विभाग मिला। यहीं से गडकरी की असली पहचान बनी, उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का सपना देखा। उस दौर में जब लोगों को यह असंभव लगता था, लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ देखा नहीं, बनाया भी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे भारत का पहला छह लेन का द्रुतगति मार्ग था और यह गडकरी के उस जुनून का पहला सबूत था जो आगे चलकर पूरे देश में फैलने वाला था।
2009 से 2013 तक वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, वह दौर पार्टी के लिए कठिन था और उन्होंने संगठन को संभाले रखा। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी और गडकरी को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मिली। फिर उन्होंने जो किया, वह भारत के बुनियादी ढाँचे के इतिहास में एक नया अध्याय है।
2014 जब में गडकरी ने यह मंत्रालय संभाला तब देश में हर दिन औसतन बारह किलोमीटर राजमार्ग बनता था। उन्होंने इसे पहले तीस, फिर चालीस और फिर पचास किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुँचाया। यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है। यह एक पूरी व्यवस्था को बदलने की कहानी है। फाइलों में दबे प्रोजेक्ट निकाले, अड़चनें हटाईं, नई तकनीक अपनाई और सबसे ज़रूरी जवाबदेही तय कर फैसले लिए।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, ये सिर्फ सड़कें नहीं हैं, ये उन इलाकों का भाग्य बदलने वाले रास्ते हैं जो दशकों से उपेक्षित थे। उन्होंने यह भी समझा कि सड़क बनाना काफी नहीं, सड़क पर चलने वाले वाहन भी बदलने होंगे। इसीलिए उन्होंने वैकल्पिक ईंधन इथेनॉल, बायोडीज़ल, हाइड्रोजन पर ज़ोर दिया। यह उनकी दूरदृष्टि का ही प्रमाण है।
गडकरी की खास बात यह है कि वे किसी भी दल के नेता के साथ काम करने में संकोच नहीं करते। राज्यों में चाहे जिस दल की सरकार हो, वे परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हैं। विपक्षी नेता भी अपने राज्यों में सड़क परियोजनाओं के लिए उनके पास जाते हैं और गडकरी साथ देते हैं। यह उनकी उस सोच को दर्शाता है कि विकास का काम राजनीति का मोहताज नहीं।
नागपुर में उनके अपने व्यावसायिक और सामाजिक प्रयोग भी उल्लेखनीय हैं। उन्होंने किसानों के लिए सहकारी आधार पर कई उद्योग स्थापित करने में मदद की। वे मानते हैं कि गाँव तभी बदलेगा जब वहाँ रोज़गार होगा और रोज़गार तभी होगा जब वहाँ तक अच्छी सड़क पहुँचेगी। व्यक्तित्व में वे खुले और सरल हैं। अपनी आलोचना भी सुनते हैं और ज़रूरत पड़ने पर अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने से नहीं चूकते। यही बेबाकी उन्हें अलग बनाती है।
नितिन जयराम गडकरी ने यह साबित किया है कि राजनीति में अगर इरादा साफ हो और काम पर ध्यान हो तो नतीजे दिखते हैं। उन्होंने सड़कों को सिर्फ पत्थर और डामर नहीं रहने दिया, उन्हें उम्मीद का रास्ता बना दिया। जब भारत की अगली पीढ़ी इन चौड़े राजमार्गों पर दौड़ेगी तो उन्हें गडकरी याद आएँ या न आएँ, लेकिन वह रास्ता उनकी विरासत बोलता रहेगा।
Share Your Comments
Related Posts
India and Canada Launch Trade Forum — Economic Chapter of mutual Benefits...
The timing is crucial. India and Canada went through a serious diplomatic falling out in 2023, which had nearly finished bilateral trade progress. But the political winds shifted when Canadian Prime Minister Mark Carney took office and visited India in March 2026.
India and the US Press Reset- What the Jaishankar-Rubio Talks Really Mean for India...
The biggest takeaway for the average Indian, whether a business owner, a student planning to go abroad, or a professional in the IT sector is the trade deal. Marco said at the joint press conference that the pending India-US trade deal is on the "verge" of happening
George Soros and His 5 Propaganda Campaigns Against India — Why India Must Stay Alert...
The Guardian is a partner of Project Syndicate, a network of over 500 media outlets across 156 countries, primarily funded by George Soros