ये हैं देवी के 9 रूप, शुभ रंग और सरल मंत्र...


banner

शारदीय नवरात्रि क्या है?

हर साल दो बड़ी नवरात्रि मनाई जाती हैं, एक चैत्र नवरात्रि (मार्च–अप्रैल) और दूसरी शारदीय नवरात्रि (सितंबर–अक्टूबर)। इनमें से शारदीय नवरात्रि सबसे ज़्यादा लोकप्रिय और धूमधाम से मनाई जाती है। इसे “महा नवरात्रि” भी कहते हैं।

पहला दिन क्यों खास होता है?

नवरात्रि का पहला दिन प्रतिपदा तिथि पर आता है। इसी दिन घर-घर में माँ दुर्गा का स्वागत होता है। लोग कलश स्थापना (घटस्थापना) करते हैं, यानी मिट्टी के बर्तन में जौ बोकर, पानी भरकर, नारियल और आम की पत्तियाँ लगाकर, माँ दुर्गा को बुलाते हैं। यह प्रतीक होता है नए जीवन और शुभ शुरुआत का।

धार्मिक मान्यता

कहते हैं कि शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने माँ दुर्गा को शक्ति का रूप देकर महिषासुर नाम के राक्षस का वध करने के लिए बुलाया था। इसलिए ये नौ दिन शक्ति की पूजा के लिए माने जाते हैं।

आजकल लोग कैसे मानते हैं?

•            घर में घटस्थापना करके रोज़ दीया जलाना

•            नौ दिन व्रत रखना (कोई फलाहार करता है, कोई बिना अनाज का खाना खाता है)

•            गरबा, डांडिया और पूजा-पाठ करना

•            सोशल मीडिया पर भी लोग माँ के भजन शेयर करते हैं

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है।

कौन हैं माँ शैलपुत्री?

•            "शैल" मतलब पहाड़ और "पुत्री" मतलब बेटी।

•            माँ पार्वती का ये पहला रूप है, जिन्हें हिमालय पर्वत की बेटी माना जाता है।

•            हाथ में त्रिशूल और कमल होता है, और सवारी बैल (नंदी) है।

इनका महत्व

माँ शैलपुत्री को प्रकृति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इनकी पूजा करने से मन में स्थिरता और ताकत आती है।

कहते हैं कि अगर इंसान का मन बार-बार भटकता है या काम में ध्यान नहीं लगता, तो माँ शैलपुत्री की पूजा से मन को शांति मिलती है।

पहले दिन पूजा कैसे होती है?

•            सुबह नहा-धोकर साफ कपड़े पहनते हैं।

•            घटस्थापना (कलश स्थापना) करके माँ को आमंत्रित किया जाता है।

•            माँ शैलपुत्री को जल, फूल, चंदन, धूप-दीप और नैवेद्य (फल/मिठाई) अर्पित किए जाते हैं।

•            भक्त लाल या पीले फूल चढ़ाते हैं, क्योंकि ये रंग माँ को प्रिय माने जाते हैं।

•            फिर दुर्गा सप्तशती या शैलपुत्री स्तुति का पाठ करते हैं।

पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करके हम एक तरह से अपनी "नई शुरुआत" करते हैं। जैसे किसी नए काम से पहले नींव मज़बूत करनी पड़ती है, वैसे ही नौ दिनों की पूजा की नींव माँ शैलपुत्री की आराधना से रखी जाती है।

दूसरे दिन – माँ ब्रह्मचारिणी

गुण: तपस्या, संयम और धैर्य की देवी। इन्होंने सालों तक कठोर तप किया।

आशीर्वाद: भक्त को कठिन समय में धैर्य और साहस मिलता है। पढ़ाई-लिखाई और एकाग्रता के लिए खास रूप से पूजनीय।

तीसरे दिन – माँ चंद्रघंटा

गुण: इनके माथे पर अर्धचंद्र होता है, जो शांति और वीरता का प्रतीक है।

आशीर्वाद: डर और नकारात्मकता से मुक्ति देती हैं। जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।

चौथे दिन – माँ कूष्माण्डा

गुण: इन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री कहा जाता है। इनके मुस्कुराने से ही ब्रह्मांड की रचना हुई।

आशीर्वाद: सेहत और उर्जा का वरदान देती हैं। रोग और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।

पाँचवें दिन – माँ स्कंदमाता

गुण: ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। गोद में पुत्र को लेकर विराजमान रहती हैं।

आशीर्वाद: मातृत्व सुख और परिवार में प्रेम का आशीर्वाद मिलता है। संतान सुख और घर में शांति की कामना पूरी करती हैं।

छठे दिन – माँ कात्यायनी

गुण: इन्हें दानवों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। बहुत वीर और शक्तिशाली रूप।

आशीर्वाद: विवाह की इच्छाओं को पूरा करती हैं। साहस और आत्मरक्षा की शक्ति देती हैं।

सातवें दिन – माँ कालरात्रि

गुण: इनका रूप सबसे उग्र है, लेकिन ये भक्तों के लिए हमेशा मंगलकारी हैं।

आशीर्वाद: डर, जादू-टोना और बुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। साहस और सुरक्षा का वरदान देती हैं।

आठवें दिन – माँ महागौरी

गुण: इनका रूप बहुत ही शांत, कोमल और उज्ज्वल है। पवित्रता और दया की देवी।

आशीर्वाद: मन की शांति, पवित्रता और जीवन में सुख-समृद्धि देती हैं। कष्टों को दूर करती हैं।

नौवें दिन – माँ सिद्धिदात्री

गुण: ये सभी सिद्धियाँ और शक्तियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं। इनकी पूजा से देवी दुर्गा के पूरे स्वरूप की उपासना पूर्ण होती है।

आशीर्वाद: ज्ञान, सफलता और आध्यात्मिक शक्ति का वरदान देती हैं। जीवन में हर कार्य में सिद्धि मिलती है।

शारदीय नवरात्रि के 9 दिन और उनके शुभ रंग

पहला दिन – माँ शैलपुत्री रंग: संतरी (ऑरेंज)

(उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक)

दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी रंग: सफेद

(शांति, सादगी और पवित्रता का प्रतीक)

तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा रंग: लाल

(साहस और शक्ति का प्रतीक)

चौथा दिन – माँ कूष्माण्डा रंग: नीला (रॉयल ब्लू)

(ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक)

पाँचवाँ दिन – माँ स्कंदमाता रंग: पीला

(खुशहाली और मातृत्व का प्रतीक)

छठा दिन – माँ कात्यायनी रंग: हरा (ग्रीन)

(विकास, समृद्धि और अच्छे रिश्तों का प्रतीक)

सातवाँ दिन – माँ कालरात्रि रंग: ग्रे (धूसर)

(नकारात्मकता से सुरक्षा और संतुलन का प्रतीक)

आठवाँ दिन – माँ महागौरी रंग: बैंगनी (पर्पल)

(शांति, करुणा और रहस्य का प्रतीक)

नौवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री रंग: नीला (स्काई ब्लू)

(ज्ञान, सफलता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक)

नवरात्रि के नौ रूप और सरल मंत्र

पहला दिन – माँ शैलपुत्री

देवी: पर्वतराज हिमालय की बेटी - ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी - तप और संयम की प्रतीक - ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा - शांति और वीरता की देवी, माथे पर अर्धचंद्र - ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः

चौथा दिन – माँ कूष्माण्डा - ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री - ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

पाँचवाँ दिन – माँ स्कंदमाता - कार्तिकेय (स्कंद) की माता  - ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

छठा दिन – माँ कात्यायनी - दानवों का विनाश करने वाली, वीर रूप - ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

सातवाँ दिन – माँ कालरात्रि - अंधकार और बुराई का नाश करने वाली - ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

आठवाँ दिन – माँ महागौरी - शांति, करुणा और पवित्रता की देवी - ॐ देवी महागौर्यै नमः

नौवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री - सभी सिद्धियाँ और शक्तियाँ देने वाली - ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

शारदीय नवरात्रि में डांडिया का महत्व

डांडिया सिर्फ नृत्य नहीं है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

माँ दुर्गा की प्रतीक पूजा

डांडिया को “दांडिया-रा‍स” कहा जाता है। इसमें जो लकड़ी (डांडिया स्टिक) इस्तेमाल होती है, वह माँ दुर्गा की तलवार का प्रतीक मानी जाती है। नृत्य करते समय जब डांडिया आपस में टकराते हैं, तो यह अच्छाई और बुराई के बीच हुए संग्राम का संकेत है। नवरात्रि में जागरण का महत्व है, यानी रात में देवी की भक्ति करना। डांडिया और गरबा रात भर खेले जाते हैं ताकि भक्त जागते हुए भजन-कीर्तन और उत्सव में माँ दुर्गा का स्मरण करते रहें। डांडिया खेलना माँ दुर्गा की शक्ति का स्मरण भक्ति का उत्सव समाज में एकता और आनंद का प्रतीक माना जाता है।

Share Your Comments

Related Posts

banner

ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा-अर्चना...

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित होता है। माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की जननी हैं।

banner

मां चंद्रघंटा की पूजन विधि और आशीर्वाद...

तीसरे दिन की पूजा मां चंद्रघंटा को समर्पित होती है। इनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी होती है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का रूप बहुत तेजस्वी और वीर है, लेकिन अपने भक्तों के लिए यह बहुत दयालु और प्रेममयी मानी जाती हैं।

banner

स्त्रियां मां ब्रह्मचारिणी से ये मांग सकती हैं...

मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी सालों तक केवल फल, फिर बेलपत्र और आखिर में बिना अन्न-जल के रहकर साधना की