प्रेमानंद महाराज जी से क्या बोले एक्टर मनोज जोशी...

हिंदी फिल्मों के कलाकार मनोज जोशी ने लिया संत प्रेमानंद महाराज जी का आशीर्वाद और सुनाया गणपति अथर्वशीर्ष पाठ — कहा, “ये मेरा सौभाग्य है”
News Bharat Pratham, New Delhi, Published by Deepak, 5 November 2025, Wednesday, 5:20 IST
फिल्मों में एक्टिंग करने वाले वरिष्ठ व बहुमुखी अभिनेता मनोज जोशी ने संत प्रेमानंद महाराज जी से मुलाकात की। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। मनोज जोशी ऐसे कलाकार जो पिछले 40 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और लगभग 37 वर्षों से ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन करते आ रहे हैं। महाराज जी के सामने गणपति अथर्वशीर्ष पाठ सुनाकर सबका दिल जीत लिया।
प्रेमानंद महाराज जी से हुई भावुक भेंट
‘राज राज’ उत्सव के दौरान भी मनोज ने लोकप्रिय नाटक चाणक्य का मंचन किया था। मंचन के बाद फिर जब वे महाराज प्रेमानंद जी से मिलने पहुंचे, तो उन्होंने बेहद श्रद्धा और भक्ति भाव से महाराज जी के चरणों में नमन किया और बड़ी विनम्रता से कहा
महाराज जी, मैं पिछले 37 वर्षों से चाणक्य का मंचन कर रहा हूं और 40 सालों से फिल्मों में अभिनय कर रहा हूं। आज आपके दर्शन पाकर मैं धन्य हो गया।
इसके बाद मनोज जोशी ने पूरे भाव से महाराज जी को गणपति अथर्वशीर्ष पाठ सुनाया। उनके इस गूंजते हुए पाठ को सुनकर महाराज जी मुस्कुरा उठे और बोले —
“बहुत सुंदर, बहुत सुंदर!”
जोशी की ने भावुक होकर कहा — “कुछ पल आपका सानिध्य और आशीर्वाद मिला ये हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है।
महाराज जी ने भी मनोज को आशीर्वाद दिया और कहा — “आप दर्शन देने आए यह आपकी कृपा है।
मनोज जोशी: कला और अध्यात्म के संगम का प्रतीक
जोशी एक साधारण अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में उनकी कला का बड़ा योगदान है। चाणक्य नाटक में उनका अभिनय, आज भी समाज में धर्म, नीति और देशभक्ति का संदेश देता है।
आज जहां हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (Bollywood) को अक्सर नकारात्मक छवि, विवादों और दिखावे से जोड़कर देखा जाता है — वहीं मनोज जैसे मंजे हुए कलाकार उस अंधकार के बीच एक उजाला बनकर सामने आते हैं। उन्होंने दिखाया है कि संस्कृति, भक्ति और सिनेमा एक साथ चल सकते हैं, और कला भी तभी सार्थक है जब वह समाज को प्रेरणा का मार्ग दिखाए।
आशीर्वाद व सकारात्मकता की मिसाल
प्रेमानंद महाराज जी से जोशी की यह मुलाकात केवल एक अभिनेता और संत की भेंट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संगम जैसी थी जिसने यह संदेश दिया कि जब कला में भक्ति जुड़ती है, तो वह जनमानस के हृदय तक पहुँच सकती है।
सोशल मीडिया पर लोग इस भेंट की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं आज के बॉलीवुड को उनसे सीख लेनी चाहिए।
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