हनुमान अंश: नीम करौली बाबा का चमत्कार, जिसने जॉब्स और जुकरबर्ग का जीवन बदल दिया


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भारत भूमि पर कई महान संतों ने जन्म लिया है लेकिन 20वीं सदी के सबसे चमत्कारी व दिव्य संतों में 'नीम करौली बाबा' का स्थान अद्वितीय है। उनके लाखों भक्त उन्हें साक्षात हनुमान अंश मानते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और भक्तों के उद्धार की आवश्यकता होती है, तब-तब ईश्वरीय शक्तियां किसी न किसी रूप में अवतरित होती हैं।

Written by Deepak H Sriram (Editor NBP)

नीम करौली बाबा महाराज जी के जीवन को देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके भीतर बजरंगबली की अलौकिक ऊर्जा और करुणा का वास था। उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी खुद को भगवान नहीं कहा। वे सिर्फ एक साधारण सा कंबल ओढ़ते थे और स्वयं को केवल भगवान राम व हनुमान जी का तुच्छ सेवक बताते थे। हालांकि, उनके चमत्कार, बिना कुछ कहे लोगों के मन की बात जान लेना और असाध्य रोगों को दूर करने की उनकी क्षमताएं यह प्रमाणित करती थीं कि वे एक साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वयं हनुमान अंश हैं।

अपने जीवन काल में बाबा ने पूरे भारत में हनुमान जी के 108 से अधिक मंदिरों का निर्माण करवाया। उत्तराखंड की वादियों में स्थित उनका पावन आश्रम, कैंची धाम आज पूरी दुनिया में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि कलयुग में हनुमान जी ने बाबा के रूप में अवतार लिया ताकि वे भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखा सकें। आज भी जो व्यक्ति सच्चे मन से इस हनुमान अंश को याद करता है, बाबा सूक्ष्म रूप में आकर उसकी सभी बाधाएं दूर करते हैं। उनकी उपस्थिति की यह दिव्य ऊर्जा उनके हर मंदिर व आश्रम में स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है।

महान संत की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज अमेरिका की सिलिकॉन वैली तक भी पहुंची। तकनीक की दुनिया के दो सबसे बड़े नामस्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग के जीवन में कैंची धाम की यात्रा ने एक बहुत बड़ा और निर्णायक बदलाव लाया। 1974 में जब स्टीव जीवन के एक कठिन दौर से गुजर रहे थे व उन्हें अपने भविष्य का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, तब वे आध्यात्मिक शांति और मार्गदर्शन की तलाश में भारत आए व विशेष रूप से बाबा के दर्शन के लिए कैंची धाम पहुंचे थे।

यद्यपि उनके वहां पहुंचने से पहले ही बाबा महासमाधि ले चुके थे, लेकिन उस आश्रम की रहस्यमयी ऊर्जा ने जॉब्स के मन को असीम शांति दी। सालों बाद, जब फेसबुक अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा था और उसे बेचने तक की नौबत आ गई थी, तब स्टीव ने मार्क को भारत जाकर उसी कैंची धाम आश्रम में समय बिताने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग वहां गए, वहीं से उन्हें दुनिया को एक साथ जोड़ने का स्पष्ट विजन प्राप्त हुआ।

बाबा की अलौकिक शक्तियों और प्रेम ने केवल तकनीकी दिग्गजों को ही नहीं, बल्कि कई पश्चिमी विद्वानों को भी अपना शिष्य बना लिया। इनमें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर रिचर्ड अल्परट का नाम प्रमुख है, जिन्हें दुनिया आज राम दास के नाम से जानती है। बाबा के संपर्क में आने के बाद राम दास का जीवन पूरी तरह बदल गया और उन्होंने 'बी हियर नाउ' नामक बेस्टसेलर किताब लिखी, जिसने पश्चिमी देशों में भारतीय आध्यात्म की लहर ला दी।

उनके एक और प्रसिद्ध शिष्य हैं कृष्ण दास जिन्हें 'योग रॉकस्टार' भी कहा जाता है। उन्होंने बाबा के सानिध्य में कीर्तन सीखा व उसे ग्रैमी नॉमिनेशन तक पहुंचाया। बाबा के महासमाधि लेने के बाद, कैंची धाम आश्रम और भक्तों के मार्गदर्शन की पूरी जिम्मेदारी श्री सिद्धि मां ने संभाली। सिद्धि मां बाबा की परम भक्त थीं। जिन्होंने अपने अंतिम समय तक बाबा के लंगर, प्रेम व आध्यात्मिक परंपराओं को पूरी दुनिया में फैलाया।

कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर, देवदार के पेड़ों व शिप्रा नदी के किनारे बसा एक बेहद ही शांत और खूबसूरत आश्रम है। यहां पहुंचने के लिए आप ट्रेन से काठगोदाम स्टेशन आ सकते हैं और वहां से बस या टैक्सी लेकर सीधे मंदिर पहुंच सकते हैं। पहाड़ों के बीच बसी इस जगह पर आज भी उस हनुमान अंश की कृपा बरसती है यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक जादुई सुकून का अहसास होता है।

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