मानसून की बारिश भी नहीं तोड़ पा रही झारखंड के छात्रों का हौसला...


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पिछले कई दिनों से झारखंड के रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों युवा सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी टेंट लगाकर रह रहे हैं। तेज़ बारिश के बीच भी वे सिर्फ इसलिए डटे हुए हैं ताकि उनकी आवाज़ सुनी जा सके। कुछ सौ छात्रों से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब झारखंड के हाल के वर्षों के सबसे बड़े युवा आंदोलनों में बदल चुका है। इसके केंद्र में एक ऐसा सवाल है जो देश के लाखों परिवारों की चिंता बन चुका है। क्या उस परीक्षा पर भरोसा किया जा सकता है, जो आपके बच्चे का भविष्य तय करती है?

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से हुई, जो इस साल 19 अप्रैल को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि OMR उत्तर पुस्तिकाओं की जानकारी लीक हुई और पूरी भर्ती प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (JGGLCCE) को लेकर भी ऐसे ही आरोप थे। इस परीक्षा में 3 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।

29 जुलाई से झारखंड के सभी 24 जिलों से छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुट रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हर शाम हजारों नए छात्र इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। छात्र शहर में मार्च निकालकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचे, सरकार के खिलाफ नारे लगाए और स्टेडियम में ही एक अस्थायी प्रदर्शन स्थल बना लिया है। यहां भोजन, बिस्तर और ज़रूरी सामान तक की व्यवस्था समर्थकों द्वारा पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से की जा रही है। इस आंदोलन की तुलना पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए परीक्षा घोटालों के विरोध प्रदर्शनों से भी की जा रही है।

छात्र इतने नाराज़ क्यों हैं?

छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि JPSC की विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द किया जाए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए, न कि राज्य की CID को।

छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार की जांच एजेंसियों पर भरोसा नहीं है। उनका दावा है कि साल 2000 में JPSC बनने के बाद से पिछले लगभग 25 वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में कई घोटाले सामने आए, लेकिन दोषियों के खिलाफ कभी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

राज्य की CID जांच में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें TDPL नाम की निजी एजेंसी से जुड़े लोग भी शामिल हैं, जो JSSC की परीक्षाएं आयोजित कर रही थी और जिसे बाद में राज्य सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया।

जांच के दौरान पूर्व JPSC अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते से भी लंबी पूछताछ की गई। बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, पिछले साल JSSC की एक परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में आठ लोगों, जिनमें भारतीय रिजर्व बटालियन (IRB) के पांच जवान भी शामिल थे, को गिरफ्तार किया गया था।

राजनीति भी हुई गर्म

इतने बड़े आंदोलन के बाद राजनीति का इसमें आना तय था।

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता, जिनमें झारखंड बीजेपी अध्यक्ष आदित्य साहू भी शामिल हैं, ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए CBI जांच की मांग की है। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर मामले को ठीक से न संभालने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि राज्य का शिक्षा विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए सरकार की जवाबदेही और बढ़ जाती है।

दूसरी तरफ़ राज्य सरकार का कहना है कि CID जांच पहले से जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं।

झारखंड से बाहर के लोगों को इससे क्यों फर्क पड़ना चाहिए?

मामला सिर्फ झारखंड की एक परीक्षा तक सीमित नहीं है।

भारत में सरकारी नौकरी की परीक्षाएं लाखों युवाओं के लिए बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद होती हैं। खासकर झारखंड जैसे राज्यों में, जहां निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं। परिवार वर्षों तक पैसे बचाते हैं और छात्र अपनी ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल इन परीक्षाओं की तैयारी में लगा देते हैं।

ऐसे में जब पेपर लीक, OMR में गड़बड़ी या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो सिर्फ एक परीक्षा पर नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर लोगों का भरोसा उठ जाता है।

यह समस्या केवल झारखंड की ही नहीं पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, बिहार और राष्ट्रीय स्तर की NEET जैसी परीक्षाओं में भी पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं। यही वजह है कि परीक्षा की निष्पक्षता आज देशभर के युवाओं के लिए बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

आगे क्या?

फिलहाल छात्रों का आंदोलन थमता नहीं दिख रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे झारखंड विधानसभा तक मार्च करेंगे और आंदोलन को और तेज़ करेंगे। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि क्या राज्य सरकार CBI जांच के लिए तैयार होगी, या फिर अपनी CID जांच पर ही भरोसा बनाए रखेगी। आने वाले हफ्तों में यही तय करेगा कि यह टकराव कैसे खत्म होगा और झारखंड के लाखों युवाओं का सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भरोसा दोबारा लौट सकेगा या नहीं।

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