दिल्ली में स्ट्रे डॉग्स पर अब तक की पूरी अपडेट...

दिल्ली में बेघर कुत्तों (Stray Dogs) की बढ़ती संख्या पर सरकार, प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। इनका कहना है कि Dog Bite की घटनाओं के कारण सुप्रीम कोर्ट को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा है। राजधानी की सड़कों पर इस समय सुरक्षा बनाम पशु-कल्याण का बड़ा संघर्ष चल रहा है।
Written by News Bharat Pratham Desk, New Delhi, Published by Deepak Tak, 22 November 2025, Saturday, 6:30 PM IST
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली और एनसीआर में मौजूद सभी स्ट्रे डॉग्स को उठाकर शेल्टर्स में रखा जाए। वजह — स्कूलों, अस्पतालों के आसपास Dog Bite की लगातार बढ़ती घटनाएँ बताई गईं। हालांकि बाद में कोर्ट ने आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि सिर्फ वही कुत्ते शेल्टर्स में रखे जाएँ जो आक्रामक हों, या जिनमें रेबीज़ का खतरा हो।
वैक्सीनेशन व स्टेरिलाइजेशन के बाद स्वस्थ और शांत कुत्तों को उनके क्षेत्र में वापस छोड़ा जा सकता है।
MCD का नया प्लान
दिल्ली नगर निगम का कहना है कि स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
• हर एक वार्ड में निर्धारित फीडिंग पॉइंट्स।
• सार्वजनिक जगहों पर अनियंत्रित तरीके से खाना खिलाने पर रोक हो।
• कुत्तों की संख्या और व्यवहार का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।
• स्टेरिलाइज़ेशन और वैक्सीनेशन अभियान में तेज़ी लाई जाएगी।
साथ ही उन इलाकों में, जहाँ भीड़ ज्यादा है जैसे कि मेट्रो स्टेशन, बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन, सरकारी संस्थान वहां स्ट्रे डॉग्स को नहीं रहने दिया जाएगा।
विरोध भी तेज़
पशु-प्रेमी संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है
• शेल्टर पर्याप्त नहीं हैं।
• कुत्तों को उनके इलाकों से हटाने से उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ सकती है।
• ABC (Animal Birth Control) प्रोग्राम ही सबसे वैज्ञानिक समाधान है।
कई जगह प्रदर्शन भी हुए, मांग है कि इंसानों के साथ जानवरों की सुरक्षा भी नज़रअंदाज़ न की जाए।
प्रदूषण से सेहत पर वार
दिल्ली की ज़हरीली हवा ने इंसानों के साथ-साथ इन बेजुबानों का जीना भी मुश्किल कर दिया है।
• सांस की दिक्कत
• कमज़ोरी
• तेज़ी से बढ़ती बीमारियाँ
आखिर समाधान क्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक - सुरक्षा + स्टेरिलाइजेशन + नियंत्रित फीडिंग + समुदाय की भागीदारी
यही दिल्ली के लिए सही रास्ता है। साफ है, दिल्ली सिर्फ एक शहर की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि वह यह तय कर रही है कि एक आधुनिक महानगर अपने बेघर जानवरों के साथ कितना मानवीय बर्ताव कर सकता है।
आगे के फैसले तय करेंगे कि सड़कों पर सुरक्षा बढ़ेगी या करुणा की आवाज़ और बुलंद होगी। News Bharat Pratham इस विषय पर हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।
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