बदलता मौसम और हमारा घरेलू बजट: मिडिल क्लास की जेब पर कैसे पड़ रही है मार...


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आजकल टीवी पर न्यूज़ चैनल वाले गर्मी, लू और बारिश की डरावनी तस्वीरें खूब दिखाते हैं। बड़ी जगहों पर ग्लोबल वार्मिंग की बातें होती हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी बात है जिस पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता, वो है इस बदलते मौसम का असर सीधे हमारे घरेलू बजट पर। बेमौसम बरसात, झुलसा देने वाली गर्मी और कभी भी आ जाने वाले मानसून की वजह से मिडिल क्लास की बचत हर महीने कैसे साफ हो रही है, ये आज हर आम घर की परेशानी है। यह अब सिर्फ दुनिया या पर्यावरण की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी जेब व रोजमर्रा की महंगाई से जुड़ी एक ऐसी दिक्कत है जो हमारे बैंक बैलेंस को चुपचाप खत्म कर रही है।

Written by Deepak H Sriram (Editor NBP)

बढ़ता बिजली का बिल: पसीने के साथ-साथ पैसे भी निकल रहे हैं

पहले के समय में अपने दिल्ली और आस-पास के इलाकों में कड़ाके की गर्मी सिर्फ दो-तीन महीने ही पड़ती थी। लेकिन अब मार्च के आखिर से लेकर अक्टूबर तक एसी (AC), पंखे और कूलर लगातार चलाने पड़ते हैं। दिन रात दोनों समय इतनी भयंकर गर्मी होती है कि इन मशीनों के बिना काम नहीं चलता। इसका सीधा असर हमारे हर महीने के बिजली का बिल पर पड़ता है। मिडिल क्लास परिवार जो अपनी सैलरी से थोड़ा बहुत पैसा भविष्य के लिए बचाना चाहता है, उसका एक बड़ा हिस्सा तो अब सिर्फ बिजली का बिल भरने में चला जाता है। इसके ऊपर से वोल्टेज ऊपर-नीचे होने से जो चीजें खराब होती हैं, उनको ठीक कराने का खर्च अलग से जेब पर भारी पड़ता है।

रसोई का हाल: आसमान छूती सब्जियों की कीमतें

मौसम के इस अजीब बर्ताव की सबसे पहली मार हमारी रसोई व खाने की थाली पर पड़ती है। कभी खेतों में तेज लू चलने से फसलें जल जाती हैं और कभी अचानक भारी बारिश से रास्ते बंद हो जाते हैं व ट्रांसपोर्ट रुक जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि सब्जियों की कीमतें रातों-रात इतनी बढ़ जाती हैं कि आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाती हैं। टमाटर, प्याज, हरा धनिया और रोजमर्रा की सब्जियों के दाम मौसम के हिसाब से ऊपर-नीचे होते रहते हैं। ज्यादा गर्मी या बारिश में सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे मंडी में माल कम आता है। ऐसे में पूरे महीने का खर्च सोच-समझकर बनाए गए बजट से बहुत ज्यादा हो जाता है।

स्थानीय दुकानदार और उनका मंदा होता काम

बड़े-बड़े एसी वाले मॉल को छोड़ दें  व अपने लोकल मोहल्लों और गली-मोहल्ले के बाज़ारों में बैठे स्थानीय दुकानदार मौसम की इस मार को सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। इतनी तेज धूप और लू में दोपहर के वक्त बाज़ारों में एकदम सन्नाटा छा जाता है। ग्राहकों के घर से न निकलने के कारण मोहल्ले के दुकानदारों को अब अपनी दुकान खोलने और बंद करने के समय में भी बदलाव करना पड़ रहा है। अब या तो लोग सुबह-सुबह काम निपटाते हैं या फिर रात को देर तक दुकानें खोलनी पड़ती हैं। ग्राहकों का कम आना, रखा हुआ कच्चा माल खराब होना—ये सब छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है।

बीमारियों पर होने वाला खर्च: दवाइयों ने बिगाड़ा बजट

मौसम में अचानक होने वाले इन बदलावों ने बीमारियों का खतरा भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। कभी एकदम से ठंड लगना, तो कभी चिपचिपी गर्मी की वजह से वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया व शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) जैसी बीमारियां हर घर में आम हो गई हैं। इसकी वजह से हर परिवार का मेडिकल खर्च बहुत बढ़ गया है। डॉक्टर की फीस से लेकर महंगी दवाइयों तक, यह एक ऐसा खर्च है जो मौसम की वजह से हर साल हमारे बजट में सेंध लगा रहा है।

साफ बात है कि ये बदलता मौसम अब सिर्फ दूर किसी देश में पिघलते बर्फ के पहाड़ों की बात नहीं। यह सीधे हमारे किचन, हमारे मीटर बॉक्स और गली की दुकानों तक आ पहुंचा है। अगर हमने बदलते मौसम का असर और इससे बढ़ने वाली महंगाई को समझकर अपना घरेलू बजट ठीक से मैनेज नहीं किया, तो आने वाले वक्त में मिडिल क्लास की बचत कुछ भी नहीं बचेगी। हमें अपने खर्चों को इस बदलते मौसम के हिसाब से संभालना सीखना होगा, वरना महीने के आखिर में जेब हमेशा खाली ही मिलेगी।

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