आयुर्वेद से बीमारी का जड़ से इलाज: जानें आयुर्वेदिक दवा लेने का सही तरीका और नियम...

आयुर्वेद में ऐसी क्षमता है कि यह आयुर्वेदिक इलाज के द्वारा किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म कर सकता है। ये बात बिल्कुल सही है कि आयुर्वेद की दवाइयां अपना असर दिखाने में थोड़ा समय लेती हैं व इलाज लंबा चल सकता है। वहीं माना जाता है कि जब मनुष्य के शरीर में वात, कफ एवं पित्त का संतुलन बिगड़ता है तो शरीर बीमारियों का घर बनना शुरू हो जाता है। इसलिए इन दोषों को दोबारा संतुलित करने और आयुर्वेद के फायदे प्राप्त करने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों का सहारा लिया जाता है।
Written by Suman Rahul Rawat, Yoga & Wellness Writer
Read in English: Ayurvedic Healing: The Complete Guide to Ayurvedic Treatment and the Rules
कई बार जल्दी ठीक होने के चक्कर में हम आधी-अधूरी जानकारी के साथ ही इलाज में लग जाते हैं। लेकिन अगर हमें आयुर्वेद का पूरा लाभ चाहिए, तो हमें इलाज के लिए पर्याप्त समय देने के साथ-साथ कुछ विशेष बातों का ध्यान भी रखना होगा।
आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह है सबसे जरूरी
सबसे पहले यह ध्यान रखना होगा कि आयुर्वेद की दवाइयां किसी खास और योग्य आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही ली जाएं। एक योग्य विशेषज्ञ ही आपको इन बातों की सही जानकारी दे सकता है।
दवा को कब लेना है?
कितनी मात्रा में दवा का सेवन करना है?
खाली पेट लेना है या खाना खाने के बाद?
दवा को ठंडे पानी, गुनगुने पानी या दूध, किसके साथ लेना ज्यादा असरदार होगा?
बिना जानकारी के दवा लेने के नुकसान
पूरी जानकारी बिना के केवल कोई विज्ञापन देखकर या किसी भी जड़ी-बूटी बेचने वाले से दवा खरीद कर इस्तेमाल करने से वह इलाज पूरा लाभ नहीं देता है। हर बेचने वाला यह नहीं जानता कि उस दवाई का इस्तेमाल कब और कितनी मात्रा में करना है। सही आयुर्वेदिक तरीका सबसे पहले आपकी पाचन क्रिया को ठीक करता है, ताकि दवा शरीर में ठीक से अपना काम कर सके।
अनजाने में कई बार लोग दवाई की मात्रा और तरीके को समझे बिना सेवन कर लेते हैं, जिससे इसका नकारात्मक प्रभाव (Side Effects) देखने को मिलता है।
उदाहरण के लिए: यदि किसी लीवर की बीमारी वाला व्यक्ति बिना वैद्यकीय सलाह के स्वर्ण भस्म या लौह भस्म लेना शुरू कर दे, तो उसके शरीर में आगे जाकर बड़ी खराबी होने की संभावनाएं बन जाती हैं।
त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन है स्वास्थ्य का आधार
आयुर्वेद में त्रिदोष पर सबसे ज्यादा ज़ोर दिया गया है। शरीर में पित्त, वात और कफ के बिगड़ने से ही बीमारियां जन्म लेती हैं। इनके असंतुलन से किडनी, लीवर, पाचन व यौन संबंधी बीमारियों के होने की आशंका बनी रहती है।
इसलिए आप जब भी आयुर्वेद में अपनी बीमारियों का समाधान ढूंढें तो सबसे पहले किसी अच्छे विशेषज्ञ को अपनी परेशानी के बारे में विस्तार पूर्वक बताएं। बीमारी का मूल कारण व उसका सही उपचार समझें ताकि दवाइयां अपना पूरा प्रभाव दिखा सकें व सही आयुर्वेदिक इलाज से आपकी बीमारी हमेशा के लिए जड़ से खत्म हो सके।
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