‘बाइडेन’ बोले विदेशियों से नफ़रत करता है ‘भारत’...


banner

‘अमरीका’ के राष्ट्रपति ‘जो बाइडेन’ का कहना है कि ‘भारत’ की विकास की रफ्तार धीमी है और इसका उन्होंने अजीब सा कारण दिया। बाइडेन ने कहा है क्योंकि ‘भारत’ विदेशियों से नफरत करता है। ‘बाइडेन’ एक चुनावी कैंपेन में बोल रहे थे, उसी समय उन्होंने कहा ‘भारत’, ‘जापान’,’रूस’ और ‘चीन’ जैसे देशों में विकास की दर धीमी है क्योंकि यह सभी देश विदेशियों से नफरत करते हैं।

वहीं ‘अमरीका’ विदेशियों का स्वागत करता है, इसलिए ‘अमरीका’ की विकास दर अन्य देशों से कई गुना अधिक है। ‘बाइडेन’ ने कहा यह सभी देश नहीं चाहते कि उनके देश में विदेशी नागरिक आएं, बसें और काम करें इसलिए उनकी विकास दर ‘अमरिका’ की तुलना में काफी धीमी है।

इस बयान से कुछ दिन पहले ‘अमरीका’ के राजदूत ‘एरिक गारसेटी’ ने कहा था कि ‘भारत’ के लोग ‘अमरीका’ में बड़ा परिवर्तन ला रहे हैं और उन्होंने ‘अमरीका’ में रह रहे भारतीयों को खूब सराहा था। ‘गारसेटी’ ने कहा था कि ‘अमरीका’ में पढ़े भारतीयों ने यहां की अर्थव्यवथा को नई उंचाइयाँ पर पहुंचाया है और देश की नामी कम्पनियों के सीईओ भारतीय मूल के हैं।

वहीं ‘जो बाइडेन’ ने ‘भारत’ का विदेशियों से नफ़रत वाला बयान एक चुनावी कैंपेन के दौरान दिया जब वह चुनाव के लिए फ़ंड इक्टठा करने के दौरान ‘वॉशिंटन’ में जनता को सम्बोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ‘जो बाइडेन’ का रूख भारत को लेकर हमेशा से ही सकारात्मक नहीं रहा है। वह आए दिन ‘भारत’ व अन्य देशों के बारे में नकारात्मक बयान देते रहे हैं और इस बार उन्होने ‘भारत’ के साथ-साथ ‘रूस’, ‘जापान’ व ‘चीन’ को भी निशाने पर लिया है।

 

Share Your Comments

Related Posts

banner

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान भारत से बेहतर?

क्या कोई भी पढ़ा-लिखा और अपने देश का भला चाहने वाला पाकिस्तानी नागरिक यह मान सकता है कि सुरक्षा की स्थिति और प्रति व्यक्ति आय में पाकिस्तान भारत से बेहतर है?

banner

यह कांग्रेस नेता बन सकता है भारत का अगला प्रधानमंत्री?

2009 में वे भारतीय राजनीति में केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के टिकट पर उतरे। पहली ही चुनावी लड़ाई में उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। केंद्र में विदेश राज्य मंत्री बने और उस भूमिका में उनका अनुभव काम आया। 

banner

वह इंजीनियर नेता जिसने सड़कों की हालत बदल भारत का नया अध्याय लिखने का फैसला किया...

हर दिन औसतन बारह किलोमीटर राजमार्ग बनता था। उन्होंने इसे पहले तीस, फिर चालीस और फिर पचास किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुँचाया।