पापांकुशा एकादशी 2025: 3 अक्टूबर व्रत, शुभ मुहूर्त और युवाओं के लिए लाभ...
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पापांकुशा एकादशी, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है।
News Bharat Pratham Desk, New Delhi, Published by Deepak Tak, Date 02 October 2025, Thursday, 08:02 IST
यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और शास्त्रों में इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होते हैं और उसे विष्णुधाम की प्राप्ति होती है।
विशेष योग और पूजन समय
इस वर्ष पापांकुशा एकादशी पर दो विशेष योग बन रहे हैं—सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग, जिन्हें अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है।
व्रत तिथि और पारण समय:
पापांकुशा एकादशी का व्रत 3 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा।
इसका पारण अगले दिन 4 अक्टूबर 2025 को किया जाएगा।
पारण का शुभ समय 06:16 बजे से 08:37 बजे तक है।
एकादशी तिथि की शुरुआत 2 अक्टूबर शाम 07:10 बजे होगी और यह तिथि अगले दिन 3 अक्टूबर शाम 06:32 बजे तक रहेगी।
सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:15 से 9:34 तक रहेगा और इसी समय रवि योग भी प्रभावी रहेगा।
भगवान विष्णु की प्रातः आराधना का श्रेष्ठ समय 5:02 से 6:15 तक है।
संध्या पूजन, दीपदान और कीर्तन का समय 6:05 से 7:18 तक रहेगा।
महत्व और कथा
पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर महाराज से कहा कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त करता है।
इस एकादशी के नाम में ही इसका भाव छिपा है—“पाप” यानी बुरे कर्म और “अंकुषा” यानी नियंत्रण। यह तिथि जीवन के पापों पर अंकुश लगाने वाली है। साथ ही इसे पितरों की मुक्ति और शांति के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है।
पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि पापांकुशा व्रत रखने से राजाओं और भक्तों को बड़े संकटों से मुक्ति मिली और उनके जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति आई।
व्रत विधि
शारीरिक शुद्धता
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूरे दिन अन्न का त्याग करें। आवश्यकता होने पर फल, दूध, रस या व्रत का प्रसाद ले सकते हैं।
मानसिक शुद्धता
भगवान विष्णु की मंगला आरती करें, तुलसी का पूजन करें और हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें।
श्रीमद्भगवद्गीता, भागवत या अन्य धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें।
आलस्य, क्रोध, अहंकार और कटु वचन से दूर रहें तथा मन को प्रभु पर केंद्रित रखें।
पारण विधि
व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।
पारण से पहले भगवान को भोग अर्पित करें, ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और यथाशक्ति दान दें।
यदि द्वादशी के साथ त्रयोदशी या प्रदोष व्रत आए, तो पहले भगवान को चावल का एक दाना अर्पित करके पारण करें और तत्पश्चात प्रदोष व्रत का पालन करें। इससे दोनों व्रत पूर्ण माने जाते हैं।
व्रत के लाभ
पापों का शमन: संचित पाप नष्ट होते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।
आध्यात्मिक उन्नति: विष्णुभक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सांसारिक सुख: परिवार में शांति, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
मानसिक संतुलन: उपवास और जप से आत्म-अनुशासन, एकाग्रता और धैर्य विकसित होता है।
युवाओं के लिए विशेष महत्व
मन को शांति और स्पष्टता प्रदान करता है।
आत्म-अनुशासन और समय प्रबंधन सिखाता है।
अध्यात्म और नैतिकता के मूल्य जीवन में अपनाने में मदद करता है।
परिवार और समाज से धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव महसूस कराता है।
सावधानियाँ
गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, बुजुर्ग और रोगी यदि चाहें तो हल्का व्रत (फलाहार/दूध) करें।
यदि दवाइयाँ नियमित लेनी हों तो चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
व्रत का उद्देश्य स्वास्थ्य को हानि पहुँचाना नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान है।
निष्कर्ष
पापांकुशा एकादशी केवल उपवास भर नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, दान, भक्ति और पितरों के उद्धार का पवित्र अवसर है। इस दिन किए गए व्रत और पूजा से जीवन में पापों का नाश, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस एकादशी पर हम सभी भगवान विष्णु की शरण लेकर धर्म, शांति और कल्याणमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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