'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल और उनकी जेन-जी टीम का बॉक्स ऑफिस धमाल

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'हनुमान अंश' जैसी फिल्म का निर्माण एक दुर्लभ संयोग है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इसे महज़ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि नीम करोली बाबा और हनुमान जी के प्रति 20 साल लंबी एक 'तपस्या' माना है। आज जब सिनेमा में शॉर्टकट सफलता खोजी जा रही है, तब यह आध्यात्मिक फिल्म अपने अद्भुत समर्पण से बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार कर रही है और दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है।
Written by Tanya Arora (Entertainment and Lifestyle Writer)
सेट पर आध्यात्मिक अनुशासन: हाय-हैलो नहीं, 'सीता-राम' का उद्घोष
आज जहां करोड़ों का बजट, विदेशी लोकेशन्स, आइटम सॉन्ग, एक्शन और अपशब्द सफलता की गारंटी माने जाते हैं, वहां विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम ने एक अलग ही प्रतिमान स्थापित किया है। फिल्म निर्माण के दौरान चार महीने तक निर्देशक का फलाहार पर रहना, पूरी टीम का हर तरह के नशे और अपशब्दों से दूर रहना और हर दिन सेट पर काम शुरू करने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना अद्भुत है। इंटरव्यू के दौरान 'हाय-हैलो' की जगह 'सीता-राम' से अभिवादन करना यह साबित करता है कि वे सिर्फ एक फिल्म नहीं बना रहे थे, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुष्ठान कर रहे थे।
फ्लॉप होने के डर से लेकर बजट से 42 गुना कमाई तक का सफर
इस फिल्म की सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं है। निर्माता अनुप्रिया नागर के अनुसार, शुरुआत में इंडस्ट्री ने फिल्म को फ्लॉप करार दे दिया था, जिससे टीम का हौसला टूट गया था। सिनेमाघरों से उतरने की नौबत आ गई थी। लेकिन फिर हनुमान जी के नाम पर भंडारे शुरू किए गए और बाबा जी का ऐसा चमत्कार हुआ कि यह फिल्म दर्शकों के बीच फूलों की खुशबू की तरह फैल गई। आज फिल्म अपने बजट से 42 गुना ज्यादा कमाकर व्यावसायिक सफलता से कहीं आगे निकल चुकी है। यह दिखाता है कि जब नीयत साफ हो, तो काम सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचता है।
नीम करोली बाबा का वैश्विक प्रभाव और निर्माता का विजन
जहां मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स व जूलिया रॉबर्ट्स जैसी विश्वस्तरीय हस्तियां नीम करोली बाबा के चमत्कारों और शांति से प्रभावित होकर उनकी शरण में आईं, वहीं एक भारतीय निर्देशक का अपनी ही मिट्टी के संत पर इतने सालों तक बिना थके रिसर्च करना उनके गहरे विजन को दर्शाता है। विशाल के इंटरव्यूज़ में जो ऊर्जा और उत्सुकता दिखती है, वह उसी 20 साल की गहरी रिसर्च का परिणाम है।
जेन-जी निर्माता अनुप्रिया नागर खुद को महाराज जी और हनुमान जी द्वारा चुना हुआ मानती हैं। वे आज की जेन-जी पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहती हैं कि युवा निर्भय हैं और सवाल पूछना जानते हैं। वे भी आध्यात्मिक हैं बस उन्हें अपने उस आध्यात्मिक हिस्से से जुड़ने की जरूरत है।
अनोखी आस्था: दृष्टिहीन जेन-जी गायक की आवाज़ और 9 नंबर की सीट
फिल्म के संगीत में भी गहरी आस्था रची-बसी है। फिल्म में "मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागा में नैया डार दई..." भजन को दृष्टिहीन जेन-जी गायक सुनील लोधी ने गाया है। यह भजन उनके दादा जी गाया करते थे, जिसे उन्होंने बचपन से सुना था। वहीं सिनेमाघरों में आस्था का एक और अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। जहां-जहां हनुमान अंश फिल्म लगी है, वहां 9 नंबर की सीट खाली छोड़ी जा रही है। मान्यता है कि 9 नंबर बजरंगबली महाराज से जुड़ा है, इसलिए यह सीट उनके लिए आरक्षित की जा रही है।
'मिर्जापुर' के दौर में सात्विक सिनेमा की जीत
एक फिल्म की पूरी टीम का सात्विक भोजन करना और पवित्रता बनाए रखना अपने आप में टीम के संकल्प को दर्शाता है। वह भी उस दौर में जब दर्शक 'मिर्जापुर' जैसी खूनी संघर्ष और गालियों से भरी सीरीज को बेहद सफल बना देते हैं। ऐसी फिल्में इंडस्ट्री को याद दिलाती हैं कि असली सिनेमा चकाचौंध में नहीं, बल्कि कहानी की आत्मा में बसता है।
'हनुमान अंश' केवल बॉक्स ऑफिस का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय दर्शकों की आस्था की जीत है। विशाल चतुर्वेदी ने यह साबित कर दिया है कि जब काम सच्ची श्रद्धा व नीम करोली बाबा व हनुमान जी के आशीर्वाद से किया जाए तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भक्ति का जादू बिखरने को तैयार हनुमान अंश अगर आपने अभी तक नहीं देखी है, तो सिनेमाघरों में जाकर ज़रूर देखें। भक्ति भाव से सजी ऐसी फिल्मों और इसके पीछे की पूरी टीम का हौसला बढ़ाएं।
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