ना निभाए वादे व इनकी रणनीति से दिल्ली हुई ‘आप’ फ़्री...


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‘भाजपा’ ने दिल्ली से आप को किया विदा, दिल्ली ने ‘आप’ के दिग्गज नेताओं को भी नहीं बख़्शा। राजधानी ने मुफ़्त का देने वाली 'आम' को छोड़ थामा 'भाजपा' का दामन। लोगों का कहना है कि केजरीवाल पार्टी को अतिविश्वास ले डूबा। हारने वाले नेताओं में मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन, राखी बिडलान और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।

वहीं 'कांग्रेस' खाता भी नहीं खोल सकी। ‘आप’ के लिए राहत केवल इतनी रही कि उनकी आतिशी मरलेना ‘बीजेपी’ के रमेश बिधूड़ी को हराने में कामयाब रहीं हालांकि वोटों में अंतर बहुत ज़्यादा नहीं रहा।

परिणाम आने के बाद अब कई राजनितिक पंडितों का कहना है कि 'कांग्रेस' और ‘आप’ मिलकर ‘भाजपा’ के ख़िलाफ़ लड़ते तो जीत सकते थे। उनका मानना है कि ‘भाजपा’ कोई बहुत ज़्यादा अंतर से नहीं जीती है। यदि 'कांग्रेस' व ‘आप’ मतभेद भुलाकर साथ चुनाव लड़ती तो ‘बीजेपी’ को कड़ी चुनौती दे सकती थी और दिल्ली में हालात कुछ और ही होते।

वहीं ‘भाजपा’ समर्थक जीत के जश्न में सराबोर हैं और पार्टी उनके साथ धन्यवाद रैली में व्यसत है। दिल्ली से आप का सुपड़ा साफ़ होने के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। वहीं देखा जाए तो ये कुछ नाम हैं जिन्होंने आप के गढ़ में ही उनके पैरों तले ज़मीन खींच ली। दिल्ली में ‘बीजेपी’ की जीत तय करने के लिए रणनीति बनाने वालों में वीरेंद्र सचदेवा, रामबीर बिधूड़ी, बैजयंत पांडा, बीएल संतोष व पवन राणा प्रमुख रहे। हालांकि भाजपा का साथ सरकारी विभागों ने भी खूब जमकर निभाया।

अब दिल्ली जीत चुकी मोदी सरकार पर पहले ‘आप’ के अधूरे वादों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी रहेगी और उसके बाद दिल्ली को डबल इंजन की रफ़्तार से विकास की पटरी पर लाने की फ़िलहाल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी असमंजस में है। देखें प्रवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा या मनोज तिवारी कौन सीएम की कुर्सी पर विराजमान होगा। 

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